तत्त्वार्थसूत्र का विश्लेषण

General 14 views Asked 08 January, 2026

Quick Answer

तत्त्वार्थसूत्र जैन दर्शन का प्रमुख ग्रंथ है जो धर्म, ज्ञान, और मोक्ष के तत्त्वों का संक्षिप्त एवं सारगर्भित विवेचन प्रस्तुत करता है। यह ग्रंथ जैन दर्शन की मूलभूत अवधारणाओं का स्पष्ट और व्यवस्थित विश्लेषण प्रदान करता है।

Detailed Answer

तत्त्वार्थसूत्र जैन दर्शन का एक अत्यंत महत्वपूर्ण ग्रंथ है, जिसे आचार्य उमास्वामी ने रचित माना जाता है। यह ग्रंथ जैन धर्म के मूल तत्त्वों का संक्षिप्त एवं सारगर्भित विवरण प्रस्तुत करता है, जिसमें जीव, अजिव, कर्म, ज्ञान, दर्शन, और मोक्ष के विषयों का विवेचन है। तत्त्वार्थसूत्र में जैन दर्शन के सिद्धांतों को सूत्रबद्ध रूप में प्रस्तुत किया गया है, जिससे जैन धर्म की जटिल अवधारणाओं को सरलता से समझा जा सकता है। यह ग्रंथ मुख्यतः पाँच प्रमुख विषयों पर केंद्रित है: जीव (जीवन), अजिव (अजीव पदार्थ), कर्म (बंध), ज्ञान (ज्ञान की अवस्थाएँ), और मोक्ष (मुक्ति)। इसके अतिरिक्त, इसमें घातीय (घातक) और अगातीय (अघातक) कर्मों का विश्लेषण भी किया गया है, जो जीव के बंधन और मुक्ति के कारण होते हैं। तत्त्वार्थसूत्र का अध्ययन जैन दर्शन के गहन सिद्धांतों को समझने के लिए अनिवार्य माना जाता है और यह जैन तत्त्वज्ञान का आधार है।

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