जैन धर्म में कर्म क्या होता है और वह हमारे जीवन को कैसे प्रभावित करता है? पाठशाला के बच्चों के लिए सरल भाषा में समझाइए।

General 2 views Asked 18 August, 2026

Quick Answer

जैन धर्म में कर्म आत्मा पर चिपकने वाला सूक्ष्म पदार्थ है जो हमारे अच्छे या बुरे कर्मों के अनुसार हमारे जीवन को प्रभावित करता है। यह कर्म हमारे जन्म, सुख-दुख और मुक्ति के चक्र को नियंत्रित करता है।

Detailed Answer

जैन धर्म के अनुसार कर्म केवल हमारे कर्मकांड या कर्मों का नाम नहीं है, बल्कि यह एक प्रकार का सूक्ष्म पदार्थ है जो आत्मा से चिपक जाता है और उसकी शुद्धि में बाधा डालता है। जैसे हम धूल से कपड़े गंदे हो जाते हैं, वैसे ही कर्म आत्मा को अशुद्ध बनाते हैं। कर्मों के अनुसार ही हमें अगले जन्म में सुख या दुख मिलता है, और यही कर्म हमें जन्म-मरण के चक्र में बांधे रखते हैं। इसलिए जैन धर्म में कर्मों की निरजा (नाश) करना और आत्मा को उनसे मुक्त करना सबसे महत्वपूर्ण माना गया है। इस विषय में समझाने वाले ग्रंथों के अनुसार, जीव स्वयं कर्मों का कर्ता, भोक्ता और मुक्त करने वाला होता है, अर्थात कर्मों के प्रभावों को वह खुद अनुभव करता है और उनसे मुक्ति भी स्वयं ही प्राप्त करता है (Karm Bandhan evam Mukti ki Prakriya by Samdarshimuni, 1979)। इसलिए अच्छे कर्म करने और बुरे कर्मों से बचने की शिक्षा जैन धर्म की मूल बात है, जिससे जीवन में शांति और मुक्ति मिलती है।

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