सुविधिनाथ (पुष्पदंत) भगवान का मोक्ष (निर्वाण) कल्याणक 2026: सुविधिनाथ भगवान को मोक्ष कहाँ और कैसे प्राप्त हुआ, और जैन उनका निर्वाण कल्याणक कैसे मनाते हैं?
Quick Answer
सुविधिनाथ (पुष्पदंत), 9वें तीर्थंकर, का मोक्ष सम्मेद शिखर पर हुआ था और जैन समुदाय उनका निर्वाण कल्याणक भाद्रव शुक्ल नवमी को मनाता है।
Detailed Answer
सुविधिनाथ, जिन्हें पुष्पदंत के नाम से भी जाना जाता है, जैन धर्म के 9वें तीर्थंकर हैं जिनका जन्म काकंदी में हुआ था और उनका मोक्ष सम्मेद शिखर पर हुआ था। उनका मोक्ष कल्याणक जैन पंचांग के अनुसार भाद्रव शुक्ल नवमी तिथि को मनाया जाता है, जो वर्ष 2026 में 20 सितंबर को पड़ रहा है। यह निर्वाण कल्याणक जैन समुदाय द्वारा श्रद्धा और विधिपूर्वक मनाया जाता है, जिसमें तीर्थंकर के मोक्ष की महत्ता और उनके द्वारा प्रदत्त आध्यात्मिक मार्ग का स्मरण होता है। इस अवसर पर जैन श्रद्धालु उपवास, प्रार्थना, और ध्यान करते हैं तथा तीर्थंकर के जीवन और शिक्षाओं का अध्ययन करते हैं। मोक्ष कल्याणक का यह पर्व जैन धर्म में अत्यंत पवित्र माना जाता है क्योंकि यह आत्मा के मोक्ष और जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति का प्रतीक है। ध्यान देने योग्य है कि यह तिथि भारत के स्थानीय पंचांग के अनुसार निर्धारित होती है, इसलिए किसी अन्य स्थान के पंचांग में एक दिन का अंतर हो सकता है। इस प्रकार, सुविधिनाथ भगवान का मोक्ष कल्याणक जैन धर्म की आध्यात्मिक परंपरा में एक महत्वपूर्ण उत्सव है जो आत्मा की शुद्धि और मुक्ति की ओर प्रेरित करता है।
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