वन्दितु सूत्र के विषय में कौन-सी आचार्य की शिक्षाएँ या कौन-से जैन आगमों में इसका उल्लेख मिलता है? शास्त्रीय आधार और ग्रंथों का संदर्भ भी दीजिए।

General 2 views Asked 18 August, 2026

Quick Answer

वन्दितु सूत्र का उल्लेख मुख्यतः जैन आगमों में मिलता है और इसकी शिक्षाएँ आचार्य गुणसेन, वर्धमान काकनन्दी तथा आर्यनन्दी जैसे आचार्यों से जुड़ी हैं।

Detailed Answer

वन्दितु सूत्र जैन धर्म के प्राचीन आगमों में वर्णित एक महत्वपूर्ण सूत्र है, जिसका पाठ और शिक्षाएँ श्रमण और श्रमणी के आवश्यक सूत्रों में सम्मिलित हैं। आचार्य गुणसेन, वर्धमान काकनन्दी, और आर्यनन्दी जैसे आचार्यों के उल्लेख तामिलनाडु के 7वीं-8वीं शताब्दी के जैन शिलालेखों में मिलते हैं, जो इस सूत्र के प्राचीन और प्रामाणिक होने का संकेत देते हैं। इसके अतिरिक्त, मुनि श्री प्रमाणसागरजी, जो आचार्य विद्यासागर जी के प्रमुख शिष्य हैं, ने आगमों की मूल भाषा अर्धमागधी में इस सूत्र के महत्व को रेखांकित किया है। विभिन्न जैन आगमों और सूत्रों के तुलनात्मक अध्ययन से यह ज्ञात होता है कि वन्दितु सूत्र के पाठ में कुछ भिन्नताएँ हो सकती हैं, परन्तु इसकी शिक्षाएँ परंपरा और अनुश्रुति के आधार पर मान्य हैं। यह सूत्र प्रतिक्रमण और आत्मा की शुद्धि के लिए आवश्यक है, जिसमें श्रावक अपने व्रतों के अतिचारों की आलोचना करते हैं। इसलिए, वन्दितु सूत्र को जैन धर्म के प्राचीन और महत्वपूर्ण ग्रंथों में स्थान प्राप्त है, जिसका अध्ययन और पाठ आज भी जैन समुदाय में होता है।

Source References

This answer is generated by JainGPT and grounded in primary Jain scriptures, commentaries and scholarly texts from our digitised library. See the cited references below and our editorial standards.

Loading references...

Was this answer helpful?

Your feedback helps more seekers find trustworthy Jain wisdom.

Comments (Loading...)

Loading comments...