ॐ ह्रीँ अर्हँ णमो अरिहंताणं णमो जिणाणं ॐ ह्रॉं ह्रीँ ह्रूँ ह्रौँ ह्रः अ सि आ उ सा अप्रतिचक्रे फट् विचक्राय झ्रौं झ्रौं स्वाहा। Explain this mantra word by word

General 0 views Asked 30 October, 2026

Quick Answer

यह मंत्र अरिहंतों, जिनों और उनके दिव्य शक्तियों को समर्पित है, जो आत्मा की शुद्धि और मोक्ष के लिए जाप किया जाता है।

Detailed Answer

इस मंत्र में सबसे पहले ॐ ह्रीँ अर्हँ णमो अरिहंताणं का अर्थ है 'ॐ' (सर्वशक्तिमान ध्वनि), 'ह्रीँ' (शुद्धि और आध्यात्मिक ऊर्जा का बीजाक्षर), 'अर्हँ' (योग्य, अर्थात् अरिहंत जिन्हें मोक्ष प्राप्ति के योग्य माना जाता है), और 'णमो अरिहंताणं' का अर्थ है अरिहंतों को नमन। इसके बाद 'णमो जिणाणं' का अर्थ है जिनों (जिन धर्म के सिद्ध पुरुष) को प्रणाम। फिर मंत्र में ॐ ह्रॉं ह्रीँ ह्रूँ ह्रौँ ह्रः ये बीजाक्षर हैं जो विभिन्न दिव्य शक्तियों और आध्यात्मिक ऊर्जाओं का संचार करते हैं। 'अ सि आ उ सा' भी बीजाक्षर हैं जिनका उच्चारण ध्यान और साधना में ऊर्जा के संचार के लिए किया जाता है। अंत में 'अप्रतिचक्रे फट् विचक्राय झ्रौं झ्रौं स्वाहा' यह शक्तिशाली मंत्रात्मक शब्द हैं जो नकारात्मक ऊर्जा का नाश करते हुए, साधक को आध्यात्मिक उन्नति और मोक्ष की ओर ले जाते हैं। इस प्रकार यह मंत्र अरिहंतों और जिनों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हुए आत्मा की शुद्धि, कर्मों के नाश और मोक्ष की प्राप्ति के लिए जाप किया जाता है। यह मंत्र जैन साधना में विशेष महत्व रखता है क्योंकि इसमें अरिहंतों के प्रति श्रद्धा और आत्मा की मुक्ति का सार निहित है।

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