गणेश चतुर्थी 2026: गणेश चतुर्थी और संवत्सरी एक ही तिथि, भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को आते हैं — इस दिन जैन क्या करते हैं, और जैन धर्म गणेश को किस दृष्टि से देखता है?
Quick Answer
गणेश चतुर्थी और संवत्सरी भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को 2026 में एक साथ आते हैं, इस दिन जैन समुदाय पर्युषण पर्व के अंतर्गत आत्मपरीक्षा, क्षमावाणी और प्रायश्चित करते हैं, जबकि गणेश को जैन धर्म में कोई विशेष पूजा या देवता के रूप में नहीं माना जाता।
Detailed Answer
2026 में गणेश चतुर्थी और संवत्सरी दोनों तिथियाँ भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को पड़ती हैं, जो 15 सितंबर को है, और यह दिन श्वेतांबर जैन समुदाय के लिए पर्युषण पर्व का समापन दिवस भी है। इस दिन जैन श्रद्धालु अपने व्रतों का समापन करते हुए आत्मपरीक्षा करते हैं, अपने पापों के लिए क्षमायाचना (क्षमावाणी) करते हैं और प्रायश्चित के माध्यम से आत्मा की शुद्धि का प्रयास करते हैं। संवत्सरी तिथि विशेष रूप से श्वेतांबर मुर्तिपूजक एवं तपागच्छ संप्रदायों में महत्वपूर्ण है, जबकि स्थानकवासी और तेरापंथी समुदाय इसे पंचमी पक्ष में मनाते हैं। जैन धर्म में गणेश को पारंपरिक हिन्दू देवता के रूप में पूजा नहीं जाता क्योंकि जैन दर्शन में कोई देवता आत्मा की मुक्ति में बाधक नहीं माना जाता, बल्कि आत्मा के कर्मों का निवारण और मोक्ष ही लक्ष्य है। अतः गणेश चतुर्थी के दिन जैन साधु-संत ध्यान, उपवास और प्रायश्चित करते हैं, पर गणेश की पूजा या आराधना का स्थान जैन धर्म में नहीं है। जैन त्योहार और व्रत चंद्र कैलेंडर के अनुसार चलते हैं, इसलिए ग्रेगोरियन तिथि हर वर्ष बदलती रहती है और स्थानीय जैन संघ के पंचांग के अनुसार भिन्न हो सकती है।
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