जगद्गुरु हीरविजयसूरि स्वर्गारोहण दिवस 2026: जगद्गुरु आचार्य हीरविजयसूरि कौन थे, और सिरोही से उनका क्या संबंध है? भादरवा सुद 11 उनका स्वर्गारोहण दिवस क्यों है, सिरोही में उन्हें आचार्य पदवी कैसे मिली, और सम्राट अकबर ने उनके उपदेश से क्या किया?
Quick Answer
जगद्गुरु आचार्य हीरविजयसूरि को आचार्य पदवी सिरोही में मिली थी, और सिरोही के महाराव सूरताण ने उन्हीं के उपदेश से अमारि प्रवर्तन का आदेश दिया। विक्रम संवत 1652 की भादरवा सुद 11 को ऊना (सौराष्ट्र) में उनका स्वर्गवास हुआ — यही उनका स्वर्गारोहण दिवस है। सम्राट अकबर ने उन्हें ‘जगद्गुरु’ पदवी दी और उनके उपदेश से पर्व-दिनों में अहिंसा के फरमान जारी किए।
Detailed Answer
जगद्गुरु आचार्य श्री हीरविजयसूरि (तपागच्छ, विजयदानसूरि के पट्टधर) का सिरोही से सीधा संबंध है — आचार्य पदवी उन्हें सिरोही में ही प्रदान की गई थी, और सिरोही के उत्तुंग शिखर चौमुखा मंदिर की प्रतिष्ठा भी उन्हीं के हाथों हुई (सिरोही जिले में जैनधर्म, पृ. 25)। सिरोही से उनका नाता यहीं नहीं रुकता — सिरोही के महाराव सूरताण ने उन्हीं के उपदेश से अमारि प्रवर्तन (अहिंसा-पालन, जीव-वध निषेध) का आदेश जारी किया था (पृ. 28)। इसी कारण सिरोही को उनकी पदवी-भूमि माना जाता है।
भादरवा सुद 11 क्यों? विक्रम संवत 1652, भादरवा सुद 11 के दिन सौराष्ट्र में दीव बंदर के निकट ऊना (उन्नतपुर) ग्राम में उनका स्वर्गवास हुआ। मच्छुंद्री नदी के तट पर उनका अंतिम संस्कार हुआ, और वह स्थान आज शाहबाग नाम से जाना जाता है। इसीलिए यह तिथि उनका स्वर्गारोहण दिवस है; संवत् 2083 में यह 22 सितंबर 2026 को है।
अकबर और जगद्गुरु पदवी: सम्राट अकबर उनसे अत्यंत प्रभावित हुए और उन्हें ‘जगद्गुरु’ की पदवी से सम्मानित किया — इसी से वे अकबर-प्रतिबोधक कहलाए। उनके उपदेश से अकबर ने पर्युषण आदि पर्व-दिनों में जीव-हिंसा बंद कराने के फरमान जारी किए, जो जैन इतिहास में अहिंसा की बड़ी विजय मानी जाती है।
अधिक पढ़ें: हीरविजयसूरि जीवन चरित्र — चिमूभाई त्रिकमलाल श्रॉफ (1961); अकबर प्रतिबोधक हीरविजयसूरि — अरुणविजय (1989); जगद्गुरु हीरविजयसूरि संक्षिप्त जीवन चरित्र — रत्नकीर्तिविजय (2013)।
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