जैन नववर्ष क्यों कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को मनाया जाता है?
Asked as: “जैन नववर्ष — गौतम स्वामी केवलज्ञान 2026: कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा जैन नववर्ष क्यों है? महावीर निर्वाण की अगली सुबह गौतम स्वामी को केवलज्ञान कैसे हुआ, और इस दिन क्या पढ़ा-सुना जाता है?”
Quick Answer
जैन नववर्ष कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को महावीर निर्वाण के अगले दिन गौतम स्वामी के केवलज्ञान के कारण मनाया जाता है। इस दिन गौतम स्वामी को महावीर स्वामी के निर्वाण के बाद केवलज्ञान प्राप्त हुआ था।
Detailed Answer
जैन नववर्ष कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को इसलिए मनाया जाता है क्योंकि यह दिन महावीर स्वामी के निर्वाण के अगले दिन आता है, जब उनके प्रमुख शिष्य गौतम स्वामी को केवलज्ञान की प्राप्ति हुई थी। महावीर स्वामी, जो 24वें तीर्थंकर हैं, का निर्वाण पावापुरी में हुआ था और उनकी मृत्यु के अगले दिन गौतम स्वामी को केवलज्ञान की प्राप्ति हुई, जो मोक्ष की ओर अंतिम आध्यात्मिक उपलब्धि मानी जाती है। इस दिन जैन समुदाय में विशेष पूजा, पाठ और श्रवण होते हैं, जिनमें केवलज्ञान कल्याणक की महत्ता और महावीर स्वामी के उपदेशों का स्मरण किया जाता है। इस अवसर पर जैन ग्रंथों का पाठ और प्रवचन होते हैं, जो आत्मा की शुद्धि और मोक्ष के मार्ग को समझाने में सहायक होते हैं। यह तिथि जैन पंचांग के अनुसार कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को पड़ती है, जो 2026 में 19 अक्टूबर को है, और यह तिथि भारत के स्थानीय पंचांग के आधार पर निर्धारित होती है, इसलिए कुछ स्थानों पर एक दिन का अंतर हो सकता है। इस दिन का महत्व केवलज्ञान की प्राप्ति से जुड़ा होने के कारण जैन धर्म में अत्यंत पवित्र माना जाता है।
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