कौन सी इन्द्रीय वाले जीव त्रस नाडी के बाहर भी होते हैं

Cosmology 286 views Asked 21 September, 2025

Quick Answer

त्रस नाड़ी के बाहर केवल एकेंद्रिय (स्थावर/निगोदिया) जीव होते हैं। दो इंद्रिय से लेकर पाँच इंद्रिय तक के त्रस जीव केवल त्रस नाड़ी के भीतर ही निवास करते हैं; विग्रहगति में कुछ अपवाद बताए गए हैं।

Detailed Answer

त्रस नाड़ी के बाहर केवल एकेंद्रिय (स्थावर) जीव होते हैं — पाँच इंद्रिय वाले जीव नहीं।

जैन लोक-रचना के अनुसार लोक के ठीक बहुमध्य भाग में एक राजू लम्बी, एक राजू चौड़ी और चौदह राजू ऊँची त्रस नाड़ी स्थित है। त्रस जीव — अर्थात् दो इंद्रिय से लेकर पाँच इंद्रिय तक के जीव — केवल इसी त्रस नाड़ी के भीतर निवास करते हैं। त्रस नाड़ी के बाहर शेष लोक में केवल निगोदिया अर्थात् स्थावर (एकेंद्रिय) जीव ही रहते हैं।

क्षेत्र की दृष्टि से यह भेद और स्पष्ट होता है: सम्पूर्ण लोक का परिमाण 343 घन राजू है और त्रस नाड़ी का घनफल 14 घन राजू। शेष 329 घन राजू में मात्र स्थावर जीव ही पाये जाते हैं, त्रस नहीं। इसी कारण कहा गया है कि सर्वत्र लोक में स्थावर जीव भरे हुए हैं, जबकि त्रस जीव लोक के मध्य त्रस नाड़ी में ही हैं।

अपवाद — और प्रश्न में "भी" का यही अर्थ है: त्रस जीव कुछ अपवादों को छोड़कर त्रस नाड़ी के भीतर ही रहते हैं। विग्रहगति अर्थात् जन्मान्तर के समय की गति में जीव त्रस नाड़ी से बाहर के क्षेत्र से होकर भी जा सकता है। जैसे अधोलोक की विदिशा में स्थित कोई जीव ऊर्ध्वलोक में उत्पन्न होने वाला हो, तो वह पहले समय में विषम श्रेणि से समश्रेणि पर आता है, दूसरे समय में त्रस नाड़ी में प्रवेश करता है, तीसरे समय में ऊर्ध्वलोक की ओर गमन करता है, और चौथे समय में त्रस नाड़ी से बाहर निकलकर अपने उत्पत्ति-स्थान पर उत्पन्न होता है।

संक्षेप में — स्थायी निवास की दृष्टि से त्रस नाड़ी के बाहर केवल एकेंद्रिय स्थावर जीव हैं; पंचेंद्रिय सहित समस्त त्रस जीवों का निवास त्रस नाड़ी के भीतर ही माना गया है।

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