नवरात्रि प्रारंभ 2026: नवरात्रि के दिनों में जैन क्या करते हैं? उसी पक्ष में आने वाली आयंबिल ओली (नवपद ओली) कैसे की जाती है, और गरबा व देवी-उपवास पर जैन धर्म क्या कहता है?
Quick Answer
नवरात्रि के दिनों में जैन साधु-संत ध्यान, तप, और प्रायश्चित्त करते हैं, जबकि श्रावक आयंबिल ओली (नवपद ओली) का पाठ करते हैं; जैन धर्म गरबा और देवी-उपवास को पारंपरिक रूप से नहीं मानता।
Detailed Answer
नवरात्रि 2026 में 11 अक्टूबर से प्रारंभ होगी, जो अशो सूद 1 तिथि पर पड़ती है, और यह तिथि जैन पंचांग के अनुसार निश्चित होती है। जैन धर्म में नवरात्रि के दौरान मुख्य रूप से साधु-संत चार मास के वसवास (चौमासा) के अंतर्गत तप, ध्यान, और प्रायश्चित्त करते हैं, ताकि आत्मा की शुद्धि हो सके। श्रावक वर्ग इस समय आयंबिल ओली या नवपद ओली का पाठ करता है, जो नौ पदों में भगवान के गुणों का स्मरण और ध्यान है, यह पाठ नवरात्रि के शुभ पक्ष में किया जाता है। आयंबिल ओली का पाठ जैन धर्म के अनुयायियों के लिए आध्यात्मिक उन्नति का साधन है और यह व्रतों के पालन और आत्मसंयम को बढ़ावा देता है।
जैन धर्म गरबा नृत्य और देवी-उपवास जैसे लोकपारंपरिक अनुष्ठानों को धार्मिक रूप से स्वीकार नहीं करता क्योंकि ये कर्म जैन सिद्धांतों के अनुरूप नहीं होते; जैन धर्म में अहिंसा, सत्य, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह के पालन पर बल दिया जाता है, इसलिए देवी-पूजा और गरबा जैसे उत्सवों में शामिल होना जैन अनुशासन के विरुद्ध माना जाता है। जैन समुदाय नवरात्रि के दौरान अपने धार्मिक नियमों का कड़ाई से पालन करता है और मुख्यतः आत्मशुद्धि, प्रायश्चित्त और ध्यान में लीन रहता है। इस प्रकार, नवरात्रि जैन धर्म में एक आध्यात्मिक समय होता है, जो तप और व्रतों के माध्यम से मोक्ष की ओर अग्रसर करता है।
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