वंदितु सूत्र के विषय में कौन से आचार्य ने किस जैन आगम में इसका उल्लेख किया है? शास्त्रीय आधार और ग्रंथों का संदर्भ भी दीजिए।
Quick Answer
वंदितु सूत्र का उल्लेख श्वेतांबर जैन परंपरा में आता है और इसे किसी एक आचार्य द्वारा रचित नहीं माना जाता, यह अवश्यक (प्रतिक्रमण) ग्रंथों में से एक है।
Detailed Answer
वंदितु सूत्र श्वेतांबर जैन परंपरा का श्रावक प्रतिक्रमण सूत्र है, जिसे इसके आरंभिक शब्द 'वंदितु' से नामित किया गया है और इसे श्राद्ध-प्रतिक्रमण सूत्र भी कहा जाता है। यह प्राकृत भाषा में लगभग पचास गाथाओं का संग्रह है जो अवश्यक (प्रतिक्रमण) परंपरा से संबंधित है तथा श्रावक-श्राविकाओं द्वारा देवासी, रै, पक्क्षी, चौमासी और संवत्सरी प्रतिक्रमणों में पाठ किया जाता है। इस सूत्र में श्रावक अपने आचरण की समीक्षा करता है और सम्यक्त्व के अतिचारों तथा बारह व्रतों (पाँच अनुव्रत, तीन गुणव्रत, चार शिखाव्रत) की क्षमा मांगता है। यह साधु के प्रतिक्रमण सूत्रों का गृहस्थों के लिए समकक्ष है। इस सूत्र का कोई एकल मूल लेखक या आचार्य निश्चित रूप से स्थापित नहीं है, अतः इसे किसी विशेष आचार्य जैसे गुणसेन, वर्धमान काकनन्दी या आर्यनन्दी से नहीं जोड़ा जाता। यह सूत्र श्वेतांबर आगम साहित्य के अंतर्गत आता है और इसके कई संस्करण उपलब्ध हैं, जिनमें हिरेलाल रसिकदास कपाडिया (1938) और संतबाल (1997) के संस्करण प्रमुख हैं। दिगंबर प्रतिक्रमण में यह सूत्र प्रयुक्त नहीं होता क्योंकि उनकी प्रतिक्रमण परंपरा भिन्न ग्रंथों पर आधारित है। अतः वंदितु सूत्र का शास्त्रीय आधार श्वेतांबर जैन आगमों में अवश्यक ग्रंथों की परंपरा है, और इसका उल्लेख किसी एक आचार्य द्वारा नहीं किया गया है।
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